तड़प ही तड़प थी …..

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सितारों की महफ़िल में है चाँद कही गुमशुदा

ढूंढ रहा उस चकोर जो ताके उसे ही हर दफा ।

लगता था जैसे चकोर ही तो पागल थी,

जो उस चाँद पर है मरती थी ,

साबित किया अब चाँद ने भी,

वफ़ा उसकी भी सच्ची थी।

किस्मत भी कितनी खफा थी उन दोनों से

आग दोनो में थी पर लकीरो में लिखी

सिर्फ तडप ही तड़प थी ।

-Sia

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