प्यार के किस्से अतीत से……

हैलो दोस्तो ! आज 14 फेब है यानी कि दुनियाभर मे प्यार का दिन जिसे हम वेलेंटाइन डे के नाम से मनाया जाता है । आज जहा दुनियाभर मे प्यार ,इकरार, चॉकलेट , रोजेस के साथ कपल्स इस दिन को मनाते है। वही भारत मे आज के दिन कुछ लोग इस दिन का विरोध करते है, जबर्दस्ती प्रेमी जोड़े से राखी बंदवाते है , कई जगह पर आशिको कि पिटाई होती है ओर अब तो u.p मै एंटी रोमियो स्कोड के नाम पर पोलिस अपनी जेब गर्म करती है । बोस लोकतंत्र है यह तो चलता ही रहेगा।

भारत मे कुछ लोग ऐसे भी हे जो इस दिन को बडे जोर शोर से सेलेब्रट करते है ओर उन्ही लोगो से हिन्दी साहित्य जगत के उस प्रेमी से मुलाकात करवाना चाहता हू जिसने ना ही इस दिन को सेलिब्रेट किया ओर ना ही आशिको कि नवरात्र ( वेलेंटाइन विक ) मनाया पर उसके मोहब्बत करने के तरीके ने उसे हिन्दी साहित्य जगत में अमर बना दिया वे ओर कोई ओर नही ‘ नंबर 77 सिख राइफल जमादार लहनासिह ‘ है । जो हिन्दी साहित्य पढते है वे जान गए होंगे कि आज चन्द्रधर शर्मा गुलेरीजी द्वारा लिखित कहानी ‘उसने कहा था ‘ की बात होगी ।

गुलेरीजी ने अपने जीवन मे केवल 3 कहानियाँ ही लिखी है बुदधु का काटा, सुखमय जीवन ओर उसने कहा था पर इन तिनोमेसे वे सबसे ज्यादा ‘उसने कहा था ‘ के लिए जाने जाते है यह कहानी कालजयी अमर तो बनी साथ मे गुलेरीजी को अमर करके यह सिध्द कर दिया कि कलाकार कभी नही मरता। जब भी इस कहानी कि बात होगी या पढी जाएगी तब साथ मे गुलेरीजी को भी याद किया जाएगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या है इस कहानी मे कि यह कालजयी अमर है? तो सबसे पहले यह आधुनिक युग की सबसे पहली प्रेम कहानी है जिसे BBC के एक सर्वेक्षण अनुसार यह कहानी न सिर्फ प्रेम कहानियो मे बल्कि हिंदी साहित्य जगत की 10 बेहतरीन कहानियो मे शामिल है ।सबसे पहले तो कहानी का शिषॅक ही आपको अपनी तरफ आकर्षित करते हुए आपके मन मे यह सवाल खड़ा करता है कि किसने क्या कहा था ? ओर जब आप इसे पढते है तो यह कहानी आपका दिल जीत लेती है और आपको अपने पहले प्यार कि याद दिला देगी ।

अब बात करते हे कहानी की तो ‘उसने कहा था ‘ कि प्रेम कहानी सबसे अलग है क्योंकि इसमे आज कल के फिल्मो एवम उपन्यासो मै जो लव स्टोरी दिखाते है वेसा कुछ भी नही है यहा तक की पूरी कहानी मे प्यार शब्द का प्रयोग तक नही किया गया है पर जब आप इसे पढते है तब आप महसूस करते है कि हाँ यह प्रेम कहानी ही है । कहानी का मुख्य पात्र है अपना ‘नंबर 77 सिख राइफल जमादार लहनासिह ‘ जो कहानी का केंद्र बिंदु भी है । कहानी की शुरुआत मे लहनासिह हमारे सामने 12 साल के लडके के रूप मे आता है जो अमृतसर अपने मामा के घर पर आया हूआ है जो एक दिन अपने मामा के लिए दही लेने के लिए बाजार जाता हे ओर उस कि हमउम्र लडकी को टांगेवाले के घोड़े के निचे आने से बचाता है ओर आगे एक दुकान पर मिलते है दुकानदार व्यस्त होने के वजह से लहने को उस लड़की से बात करने का मौका मिल जाता है ओर बातो ही बातो मे वे लड़की को चिढ़ाने के लिए पूछता है कि ‘ तेरी कुडमाई हो गई? ‘( तेरी सगाई हो गई? ) ओर लड़की शर्माकर धत कहकर चली जाती है फिर जब भी वह लड़की मिलती वह चिढ़ाने के लिए वही सवाल पूछता ओर उत्तर मे धत मिलता पर एक दिन उस सवाल का एकदम विपरीत उतर मिला लड़की ने अपने सगाई हो गई बताती है ओर उस दिन लहना मुश्किल से घर पहुंचा यहा पर साफ पता चलता है कि भाई का दिल टूटा है ओर उसके मासूम प्यार कि कहानी अधूरी रह गई फिर कहानी 23 साल आगे बढ जाती है ओर अब हमारे सामने बालक लहना नही अपितु नंबर 77 सिख राइफल जमादार लहनासिह के रूप मे आता है जो युद्ध के मैदान पर अपना फर्ज निभा रहा है अब उसे अमृतसर कि वह लड़की याद तक नही थी पर वक्त का पहिया फिरसे घूमता है ओर वह लड़की फिरसे उसके सामने आ जाती है इस बार वह सूबेदारनी हौरा के रूप मे आती है और फिर से लहना को उन गलियो कि याद दिलाती है ओर अपने पति एवं बच्चे कि रक्षा करने की भिख मांगती है ओर लहना मन ही मन उसके पति ओर बच्चे की रक्षा करने का खुद से वादा करता है ओर उसी वादे को निभाते निभाते वे मोत को गले लगा लेता है और अपनी आखिरी सास तक वे उसी को याद करते हुए कहता रहता है ‘उसने कहा था ‘ ओर जिदंगी को अलविदा कहकर हिन्दी साहित्य जगत मे अमर बन जाता है ।

आज के आशिक जो प्यार के नाम पर क्राइम करते है या एसिड फेंकते है , वासना की भूख रखते है लहनासिह इन लोगो के मुह पे तमाचा है क्योंकि लहना सच्चे प्यार का परिचायक है न कुछ पाने की चाहत न कोई स्वार्थ के बिना बस उसने जो कहा था उसे खुशी खुशी पूरा करता है ओर सही मायने मे प्यार कि परिभाषा सीखा जाता है।

यह कहानी 100 साल से भी अधिक पुरानी है पर आज भी पाठको को यह नई कहानी ही लगती है ओर उनके दिलो मे जगह बनाती है ओर नजाने कितने वषॅ यह कहानी एवं लहना पाठको के दिल मे जगह बनायेंगे । आपको आज का आर्टिकल कैसा लगा मुझे कमेंट के माध्यम से बताए अब फिरसे मुलाकात एक ओर नए विषय ओर नए आर्टिकल के साथ होगी तब तक के लिए अलविदा ।

– Aryan suvada

11 thoughts on “प्यार के किस्से अतीत से……

  1. बहुत बढ़िया विषय प्रस्तुतीकरण है।
    मैंने आज ही पढ़ा।

    बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।

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